हस्ताक्षर : जॉन स्टुअर्ट मिल

जॉन स्टुअर्ट मिल
संतुष्ट मूर्ख होने से असंतुष्ट सुकरात होना बेहतर है।

  • अपने आप से पूछो : क्या मैं खुश हूँ, और तुम्हारी खुशी काफूर हो जाएगी।
  • एक पीढ़ी में जो बात चरम मूर्खता लगती है, वही बात अकसर अगली पीढ़ी में परम बुद्धिमत्ता हो जाती है।
  • चूँकि राज्य उस गरीब को खिलाने-पिलाने के लिए जिम्मेदार है जिसने कोई अपराध किया है और जो सजा काट रहा है, उन गरीबों के लिए, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, ऐसा न करना अपराध  का  सम्मान  करना  है।  
  • मेरा मतलब यह नहीं था कि कनजरवेटिव आम तौर पर मूर्ख होते हैं; मैं कहना यह चाहता था कि मूर्ख आम तौर पर कनजरवेटिव होते हैं।
  • जिस देश में छोटे दिमागों के मत से सहमत होना बड़ा दिमाग होने की कसौटी हो, वहाँ कोई बड़ा दिमाग कैसे पैदा हो सकता है?
  • यह कहना असंगत न होगा कि सामाजिक दर्शन के क्षेत्र में, अतीत में या वर्तमान में, सभी प्रमुख विवादों में दोनों पक्ष जिस बात का समर्थन करते हैं, उसमें तो वे सही होते हैं, पर जिस बात का विरोध करते हैं, उसमें वे गलत होते हैं।
  • वह एकमात्र लक्ष्य, जिसके लिए किसी सभ्य समुदाय के किसी सदस्य के खिलाफ, उसकी इच्छा के विरुद्ध, बल प्रयोग करने का औचित्य है, है उसे किसी अन्य को चोट पहुँचाने से रोकना। उसकी अपनी भलाई के लिए ऐसा किया जा रहा है – वह चाहे शारीरिक हो या मानसिक, यह तर्क पर्याप्त नहीं है।
  • यदि समस्त मानवता का मत एक हो और सिर्फ एक व्यक्ति की राय अलग हो, तब भी मानवता को उस एक व्यक्ति को चुप कराने का अधिकार उससे ज्यादा नहीं है जितना उस व्यक्ति को, अगर उसके पास इतनी शक्ति होती, समस्त मानवता को चुप कराने का अधिकार है।
  • जो व्यक्ति आवश्यक अध्ययन और तैयारी से सोचता है, उसकी गलतियों से भी सत्य को उससे ज्यादा लाभ होता है जितना उन व्यक्तियों की सही राय से जो सोचने का कष्ट किए बगैर वह राय रखते हैं। 
  • यह सच है कि जीनियस लोगों की संख्या हमेशा कम होती है, लेकिन उनका जन्म हो सके, इसके लिए जरूरी है कि वह जमीन बना कर रखी जाए जिसमें जीनियस का जन्म होता है। जीनियस हमेशा स्वतंत्रता के वातावरण में ही खुल कर साँस ले सकता है।
  • मैं नहीं मानता कि कोई भी व्यक्ति स्त्री और पुरुष के स्वभाव के बारे में जानता है या जान सकता है जब तक उन्हें एक-दूसरे के साथ सिर्फ वर्तमान रिश्ते में देखा गया है। 
  • हमारे पास अभी तक दासता की नैतिकता और वीरता प्रदर्शन की नैतिकता रही है; अब न्याय की नैतिकता का वक्त आ गया है। 
  • कोई व्यक्ति कुछ करके या कुछ नहीं करके दूसरों की क्षति कर सकता है, और दोनों ही हालात में वह उस क्षति के लिए उत्तरदायी होता है। 
  • मैंने अपनी इच्छाओं को सीमित करने में, नकि उन्हें पूरा करने के प्रयास में, अपनी खुशी पाना सीख लिया है।
  • सामाजिक शक्ति में एक व्यक्ति का भी विश्वास उन निन्यानवे लोगों के बराबर है जिनके सिर्फ स्वार्थ हैं।  
  • लोग इसलिए गलत काम नहीं करते कि इसके लिए उनकी इच्छा मजबूत होती है; वे इसलिए ऐसा करते हैं क्योंकि उनका अंतःकरण कमजोर होता है।
  • मुझे लगता है कि समय आ गया है जब सभी का कर्तव्य है कि धर्म से अपनी असहमति जाहिर कर दें।
    यह विचार कि सताए जाने के खिलाफ हमेशा सत्य की विजय होती है, उन मधुरतम झूठों में एक है, अधिकतम अनुभव इसका खंडन करते हैं। 
  • कोई भी दास उस हद तक दास नहीं होता या इस शब्द के पूरे अर्थ में दास नहीं होता जितना दास एक पत्नी होती है। 
  • संतुष्ट सूअर होने से असंतुष्ट मनुष्य होना बेहतर है;  संतुष्ट मूर्ख होने से असंतुष्ट सुकरात होना बेहतर है।
  • जो सिर्फ किसी चीज के अपने पक्ष के बारे में जानता है, वह उसके बारे में बहुत कम जानता है।
  • बहुत-सी सचाइयाँ ऐसी हैं जिनका पूरा अर्थ व्यक्तिगत अनुभव के बिना नहीं खुलता।
  • हम कभी सुनिश्चित नहीं हो सकते कि जिस मत को दबाने की हम कोशिश कर रहे हैं, वह गलत ही है; और वह गलत हो तब भी ऐसा करना गलत होगा। 
  • जिस आदमी को भी समाज की सुरक्षा मिली हुई है, उसका फर्ज है कि वह इस सुविधा का विनिमय  मूल्य अदा करे। 
  • कोई भी ऐसा व्यक्ति बड़ा चिंतक नहीं हो सकता जो यह नहीं मानता हो कि चिंतक के नाते उसका पहला कर्तव्य है कि उसकी बुद्धि चाहे जिन निष्कर्षों तक ले जा रही हो, उसे  वहाँ तक जाने दे।
  • एकमात्र स्वतंत्रता, जिसे स्वतंत्रता कहा जा सकता है, दूसरों को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किए बिना और अपने ढंग से अपनी खुशी पाने के उनके प्रयास में अवरोध पैदा किए बिना, अपने ढंग से अपनी खुशी प्राप्त करने की स्वतंत्रता है।
  • युद्ध एक गंदी चीज है, लेकिन सब से गंदी चीज नहीं : देशभक्ति की वह पतित दशा, जिसके अनुसार कुछ भी ऐसा नहीं है जिसके लिए युद्ध किया जा सके, उससे भी ज्यादा गंदी चीज है।