मैंने माँ बनने का निर्णय क्यों नहीं किया : व्यक्तिगत : चिन्मय मंजुनाथ

चिन्मय मंजुनाथ
मैंने माँ बनने का निर्णय क्यों नहीं किया

"यह मात्र एक भ्रम है कि कोई स्त्री सिर्फ माँ होने से ही प्रसन्न, भरी-पूरी और संपूर्ण हो जाती है। "

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री हों या दुनिया की सबसे ज्यादा लोकप्रिय और सफल अभिनेत्री या फिर टेनिस युगल में नंबर वन खिलाड़ी, इन तीनों को माँ नहीं बनने के चलते पिछले सप्ताह सवालों का सामना करना पड़ा।

एक निःसंतान विवाहित स्त्री के तौर पर मैं इसे भय, सहानुभूति और हास्य के मिले-जुले भावों के साथ देखती हूँ। मैं इन तीनों की भावनाओं को महसूस करती हूँ। मैंने भी यह किया है। क्योंकि, इस तरह के आक्रामक और तल्ख सवालों का मैंने भी लंबे समय से सामना किया है, यहाँ तक कि अजनबियों से भी। ‘आप तो 35 साल की हो गई होंगी। बच्चे कर लो, बच्चों के बिना आपकी शादी बोरिंग हो जाएगी।’ जैसे सवालों से लेकर  ‘ऐसा कैसे हो सकता है कि आप बच्चा न चाहती हों। इसके लिए आपको जीवन भर पछतावा होगा’। ‘यह तो तुम सोचती हो, लेकिन तुम्हारे पति क्या सोचते हैं।’ अगर तुम बच्चे पैदा नहीं करना चाहती तो तुम्हारे पति कहाँ जाएंगे? जैसे सवाल तक इसमें शामिल हैं।

वे यूँ दिखाते हैं जैसे में बहुत स्वार्थी हूँ। मुझसे उम्मीद की जाती है कि मैं इन सवालों का जवाब दूँ, जिनमें मेरे स्वास्थ्य से ले कर एक बच्चे को पालने लायक हमारी माली हैसियत और हमारे वैवाहिक रिश्ते में स्थिरता नहीं है और तुम जिम्मेदारी लेने से डरती हो, जैसे सवाल तक शामिल हैं। तो यह है हालत। और कोई भी मेरे पति से इतने आक्रामक, पूर्वाग्रहग्रस्त और गंदे तरीके से यह सवाल नहीं पूछता। यह मैं हूँ, जिसे दस में से दस बार इन सवालों का सामना करना पड़ता है। यह कितना अजीबोगरीब है कि ज्यादातर लोग मुझमें बारीकी से खामियाँ ढूंढ़ते हैं, क्योंकि मैंने बच्चा नहीं पैदा किया।
एक शादीशुदा महिला के तौर पर मुझसे उम्मीद की जाती है कि मैं तीस साल की उम्र तक बहुत ही चाव के साथ माँ बन जाऊंगी। माँ बनने के लिए लालायित होना ही दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। इस समाज के लिए नारमल औरत वही है, जो बच्चे का पालन-पोषण करती है। इसके प्रति मेरा निरुत्साही रवैया लोगों को चिंताग्रस्त और परेशान कर देता है। वे सोचते हैं कि मैं बच्चों को पसंद नहीं करती और जब मैं कहती हूँ कि मैं बच्चों को प्यार करती हूँ तो वे मेरा विश्वास नहीं करते। कई माँओं के मुंह खुले के खुले रह जाते हैं, जब वे मुझे किसी चिड़चिड़े बच्चे को बहुत ही अच्छे तरीके से खाना खिलाते और सुलाते हुए देखती हैं। मुझे यह सारे काम बहुत ही ज्यादा मृदुता और प्यार से करते देख कर उनका अविश्वास और बढ़ जाता है। अपने भतीजे-भतीजियों और भांजों-भांजियों के साथ मेरे बहुत ही अच्छे रिश्ते रहे हैं। अपने कई दोस्तों के बच्चों को मैं बहुत ही ज्यादा प्यार करती हूँ और उनके साथ समय बिताने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती हूँ।

मदर के लिए दुनिया के सभी बच्चे उनके अपने थे
ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि बच्चों को अपने शरीर से जन्म दिए बगैर भी मातृत्व को अनुभव करना, बच्चों का पालन-पोषण करना और उनसे प्यार करना महसूस किया जा सकता है। जैसे किसी पशु और पेड़-पौधे को भी हम प्यार करते हैं। मातृत्व की भावनाओं को प्रगट करने के लिए बच्चे को पैदा करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। हाँ, यह सच है कि गर्भधारण करने, बच्चे को अपने पेट में पालने, कई-कई रातों को नहीं सोने और उस दर्द को, उस शारीरिक अवस्था, भावना और मानसिक मजबूती को मैं नहीं जानती। मैं भावनाओं की उन भारी-भरकम जटिलताओं को नहीं जानती, जिनमें अभिभावक हर दिन जीते हैं। माँ-बाप अपने बच्चे को जिस तरह से पाल-पोसकर बड़ा करते हैं, उसके प्रति मेरे मन में बहुत ज्यादा आदर है। मैं कइयों को जानती हूँ, मैंने ऐसा नहीं किया लेकिन मैं सब को सम्मान से देखती हूँ। लेकिन, मुद्दा यह है कि मैंने अपने लिए ऐसा करना नहीं चुना है।

यह क्‍या हमारे समय का विरोधाभास नहीं है कि जिस समय में हम समाज के मूलभूत आधारों को फिर से परिभाषित करने में लगे हैं, हम विवाह, अभिभावकत्व और मातृत्व की पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं में ही उलझे हुए हैं। हम लोगों को अभिभावकत्व, पितृत्व और मातृत्व को समझना और उनका आनंद लेना बगैर उनकी पुरानी भूमिका के साथ उसका मिलान किए हुए आना चाहिए । मातृत्व के कई सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाने वाले गुण अक्सर ही पिता में मौजूद मिलते हैं।

अगर हम बच्चे के पालन-पोषण को मूलभूत जरूरतों से आगे ले जाएंगे तो बच्चों को प्यार करना और उनका पालन-पोषण करना सभी के लिए संभव हो जाएगा। उम्र, लिंग, यौन पसंद और किसी के साथ रिश्ते की स्थिति का इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एन लेमोट ने अपने एक निबंध में इस बात को बहुत ही अच्छी तरह से लिखा है कि क्यों वे मदर्स डे से नफरत करती हैं। (नोट :- वे खुद माँ और दादी भी हैं) - मदर्स डे का मनाया जाना महिलाओं के साथ एक बड़ा झूठ है। कहा जाएगा कि माँ सबसे बड़ी है, कि उसने अपनी जान को भी खतरे में डाल दिया और ज्यादा कठिन जीवन खुद के लिए चुना। हुँह, हर स्त्री का रास्ता कठिन है, और कई औरतें बच्चे पैदा करने के लिए ठीक वैसे ही उपयुक्त होती हैं जैसे कि कोई बंदरिया। मैं यह बिना किसी पूर्वाग्रह के कह सकती हूँ। अफसोस है कि यह सच है। एक अस्वस्थ माँ का प्यार विध्वंसकारी है।

यह मात्र एक भ्रम है कि कोई स्त्री सिर्फ माँ होने से ही प्रसन्न, भरी-पूरी और संपूर्ण हो जाती है। लेकिन, मदर्स डे को ले कर अतिउत्साह वाली माँएँ खुद अपनी माँओं, अपने रोते बच्चों, अपने पतियों की माँओं के साथ  रेस्तराँओं में बैठेंगी और इन माँओं को एक डिब्बा चॉकलेट नहीं चाहिए, क्योंकि ये माँएं डायटिंग पर हैं। लेकिन, मदर्स डे को ले कर मेरा सबसे बड़ा कष्ट यह है कि यह अपूर्ण और गलत है। जिस चीज से किसी माँ को थोड़ी मदद मिल सकती है वह यह है कि अन्य लोग भी बच्चे के पालन-पोषण में शामिल हों। मातृत्व की इन कड़ियों से ही यह पूरा झोपड़ा तैरता रहेगा। मैं वह औरत हूँ, जिसे उसकी माँ के अलावा, उसकी माँ के बहुत अच्छे दोस्तों और अपने दोस्तों की माँओं, उनकी आयाओं, और तो और कई समलैंगिक लोगों से भी भरपूर प्यार मिला। उनके गुजर जाने के बाद भी आज तक मेरे मन में उनके लिए प्यार है।’

हर बार जब मुझसे किसी ‘शुभ  समाचार’ के  बारे में पूछा जाता है या मातृत्व बनाम कैरियर पर भाषण झाड़ा जाता है, मैं खुद से कुछ नहीं कहती। क्लेयर अंडरवुड के बड़े सीधे-सादे उस जवाब को दोहरा देती हूँ जो उन्होंने इस सवाल के जवाब में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में दिया था। उनसे पूछा गया, 'आप के बच्चे नहीं हैं, क्या इस पर कभी पछतावा होता है? ‘उन्होंने कहा, 'आपके है कभी आप इस पर पछताए?'’ क्योंकि यह पूरा मामला आपके चुनाव का है। मैंने बच्चे नहीं पैदा करना चुना। मैं उसके परिणामों से पूरी तरह वाकिफ हूँ। मैं रात को जाग कर यह चिंता नहीं करती कि तीस-चालीस साल बाद मेरे बुढ़ापे में मेरा सहारा कौन होगा। मेरी कोख उदासी में डूब नहीं जाती, जब मैं दूसरे लोगों की गोद में बच्चा देखती हूँ। मजे की बात है कि मैं और मेरे पति कभी बच्चा पैदा करने के बारे में सोचें तो लोग खुशी जाहिर करेंगे। उत्साह प्रगट करेंगे, भले ही हम अभिभावकत्व के नाम पर कबाड़ा करें। लेकिन, अगर हम ऐसा नहीं करें और अपना पूरा जीवन, अपने कैरियर, अपने घर, अपने अर्थपूर्ण रिश्तों, अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं, तब भी हम स्वार्थी, गैरजिम्मेदार और 'अस्थिर वैवाहिक रिश्ते' वाले माने जाएँगे।

अगर मैं पूरी ईमानदारी से कहूँ तो भी मैं यह नहीं कह सकती कि मैं कभी माँ बनना चाहूँगी। मुझे मेरी जिंदगी जैसी है, वैसी ही पसंद है। मैं अपनी शादी, अपने बनाए हुए परिवार, अपने काम से खुश हूँ और सच तो यह है कि मेरी दुनिया बच्चे के बिना अधूरी नहीं है। सच में नहीं है।और अगर इससे लोगों को तकलीफ है, तो उनको अपनी जिंदगियों में झाँकना चाहिए, न कि मेरी।
अनुवाद : सविता पाठक